सहारनपुर(उत्तरप्रदेश)
“सैयां भये कोतवाल, तो डर काहे का”… यह कहावत आज जनपद के व्यापारिक गलियारों में चरितार्थ हो रही है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शुमार सहारनपुर में इन दिनों जीएसटी चोरी का खेल खुलेआम चल रहा है। आरोप है कि सत्ता की धमक और प्रशासनिक ढिलाई के चलते व्यापारी बिना किसी डर के सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं।
लॉट बाजारों में बिना बिल की ‘सेल’
शहर से लेकर देहात तक, जनपद में जगह-जगह ‘लॉट बाजार’ की बाढ़ सी आ गई है। इन बाजारों में ब्रांडेड से लेकर घरेलू सामान तक कौड़ियों के दाम पर उपलब्ध हैं। लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक बड़ा स्याह पक्ष है। पड़ताल में सामने आया है कि इन केंद्रों पर बेचे जा रहे सामान का कोई पक्का जीएसटी बिल (Tax Invoice) नहीं दिया जाता। ग्राहक को सिर्फ एक सादा पर्चा थमा दिया जाता है, जिसका सरकारी रिकॉर्ड में कोई अस्तित्व नहीं होता।
कच्चे बिल का ‘मायाजाल’
खेल सिर्फ लॉट बाजारों तक सीमित नहीं है। शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी भी इसी राह पर चल पड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, कई दुकानदार ग्राहकों से जीएसटी समेत पैसे वसूलते हैं, लेकिन बिल ‘कच्चा’ काटते हैं। दिन भर की बिक्री के बाद इन कच्चे बिलों को नष्ट कर दिया जाता है या बदल दिया जाता है, जिससे वह डेटा सरकारी पोर्टल तक पहुँच ही नहीं पाता।
बड़ा सवाल: आखिर जनता से वसूला गया टैक्स किसकी जेब में जा रहा है?
सत्ता का संरक्षण या अधिकारियों की सुस्ती?
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि व्यापारियों में किसी भी प्रकार की विभागीय कार्यवाही का डर खत्म हो चुका है। चर्चा आम है कि भाजपा सरकार को व्यापारियों की हितैषी पार्टी माना जाता है, और इसी राजनीतिक रसूख का फायदा उठाकर विभागीय अधिकारी इन ‘टैक्स चोरों’ पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं। विभागीय छापेमारी और सर्वे की प्रक्रियाएं केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं।
राजस्व को भारी चपत
बिना बिल के इस व्यापार से उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने को भारी नुकसान हो रहा है। विकास कार्यों में लगने वाला पैसा चंद मुनाफाखोरों की तिजोरियों में बंद हो रहा है। यदि समय रहते जीएसटी विभाग और स्थानीय प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार नहीं किया, तो यह ‘लॉट कल्चर’ ईमानदार व्यापारियों के लिए भी संकट पैदा कर देगा।
‘द इनसाइड स्टोरी’ के लिए सहारनपुर से ब्यूरो रिपोर्ट।

Author: The Inside Story
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